सफ़र" लिखा है मगर..."रास्ता" नहीं लिखा.....
निकलूं अगर मयखाने से तो शराबी ना समझना दोस्त,
मंदिर से निकलता हर शख्स भी तो भक्त नहीं होता
माँगी हुई ख़ुशियों से....किसका भला होता है.....
मिलता वो ही है....जो हमने बोया होता है.....
दोस्ती भी क्या गज़ब की चीज़ होती है,
मगर ये भी बहोत कम लोगों को नसीब होती है,
जो पकड़ लेते है ज़िन्दगी में दामन इसका
समझ लो के जन्नत उनके बिलकुल करीब होती है…
नज़र और नसीब का कुछ ऐसा इत्तफाक है कि
नज़र को अक्सर वही चीज़ पसन्द आती है जो नसीब मेँ नहीं होती
यूँ तो मेरी हर बात समझ जाते हो
फिर भी क्यों मुझे सताते हो तुम
तुम बिन कोई और नहीं है मेरा
क्या इसी बात का फायदा उठाते हो तुम
फिर भी क्यों मुझे सताते हो तुम
तुम बिन कोई और नहीं है मेरा
क्या इसी बात का फायदा उठाते हो तुम
बदलना आता नहीं हमे मौसम की तरह,
हर इक रुत में तेरा इंतज़ार करते हैं,
ना तुम समझ सकोगे जिसे क़यामत तक,
कसम तुम्हारी तुम्हे हम इतना प्यार करते हैं
बेझिझक मुस्कुराये जो भी गम है,
जिंदगी में टेंशन किसको कम है,
अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है,
जिंदगी का नाम ही कभी ख़ुशी कभी गम है
न पूछो हालत मेरी रूसवाई के बाद,
मंजिल खो गयी है मेरी, जुदाई के बाद,
नजर को घेरती है हरपल घटा यादों की,
गुमनाम हो गया हूँ गम-ए-तन्हाई के बाद
किसी की यादो को रोक पाना मुश्किल है
रोते हुए दिल को मनाना मुश्किल है
ये दिल अपनो को कितना याद करता है
ये कुछ लफ्जो में बयाँ कर पाना मुश्किल है


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